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कन्नौज हादसे में 20 लोगों की मौत, पीएम मोदी-राहुल गांधी ने जताया

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में शुक्रवार रात हुए भीषण हादसे में यात्रियों से भरी बस देखते ही देखते आग का गोला बन गई. इस हादसे में 20 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 25 लोगों को जख्मी हालत में बचा लिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुख व्यक्त किया है.

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में हुए इस हादसे में 20 लोगों ने अपनी जान गवा दी है और 25 से ज्यादा लोग जख्मी हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं.

यह हादसा कन्नौज के जीटी रोड में कल रात हुआ जिसके बाद बस आग का गोला बन गई और बस के अंदर सवार 50 यात्री अपनी जान बचाने को चलती बस से कूदने लगे. 

. बताया जाता है कि बस में आग तब लगी जब बस और ट्रक के बीच एक सीधी टक्कर हुई और टक्कर के बाद बस में सवार सभी 50 यात्रियों पर शान का संकट आन बना जिसके बाद सवारियों ने किसी तरह अपने आपको बचाने का प्रयास किया हालांकि अभी भी कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं और गंभीर रूप से घायलों का इलाज इस समय सरकारी अस्पताल में चल रहा है. 

इस हादसे के बाद एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ है इंसानी जिंदगी की कीमत भारत के अंदर ही नहीं पूरे विश्व में बहुत कम हो गई हैं और उस पर भी यह सवाल बड़ा है कि भारत के हाईवे सुरक्षित नहीं है. अगर किसी कारण से आपको भारत के अंदर राष्ट्रीय राजमार्ग के ऊपर निकलना पड़ता है तो आपको इस चीज का एहसास अपने आप होने लगता है कि वाकई में देश के अंदर जो सड़कें हैं वह सब स्टैंडर्ड क्वालिटी की हैं.

मुझे याद नहीं पड़ता कि देश के अंदर ऐसा कोई हाईवे रहा हूं जिस पर पूरे रास्ते में हमें लाइटें मिलेगा ऐसा कोई रास्ता ना हो जिसके ऊपर कोई  खड्डाना हो और हमने  टोल  ना पे किया. भारी भरकम टोल नाके पर रकम चुकाने के बावजूद भी भारत के चौपाई या दुपहिया वाहनों को बेहद खराब सड़कों पर अपनी यात्राएं करनी पड़ रही हैं. 

बहुत हद तक संभव है कि इंसान अपनी जिंदगी की कीमत अपने बनाए रखें और खराब रास्तों पर ही बनाएगा और बिगाड़े गा. 

हिंदुस्तान के अंदर सड़क और इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम पर बहुत सारा फंड हर साल शासन किया जाता है और हर सरकार लोकसभा में संसद में बजट सत्र के दौरान यह घोषणा करती है कि हम इस साल कितने किलोमीटर नई सड़क बनाएंगे इस साल कितने किलोमीटर के 8 लेन के हाईवे चार लेन के हाईवे सोलंकी हाईवे बनाएंगे लेकिन सड़कें जब मूर्त रूप लेती हैं तो जो सड़कें हमें नजर आती हैं सड़कें ना होती तो बेहतर होता ऐसा अपने आप हमें लगने लगता है. 

सड़कों के बारे में जब तक हिंदुस्तान की सरकार भी हथकड़ी और कठोर कदम नहीं उठाएगी तब तक इस तरह के हादसे होते रहेंगे और कई घरों के दीपक पूछते रहेंगे. 

हम यही दुआ करते हैं कि कन्नौज हादसा आखरी हादसा हो और आगे से हमें कभी इस तरह की कोई खबर पढ़ने को ना मिले जिसमें किसी घर का चिराग बुझ गया हो सिर्फ इसलिए क्योंकि भारत सरकार अपने नागरिकों को सड़क अच्छी नहीं मुहैया करा पाए. 

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